Thursday, 16 April 2015

ASAFALTA-SAFALTA KI DISHA ME PEHLA KADAM

 जीवन में सफलता के महत्व से हम सभी लोग परिचित हैं। लेकिन क्या जीवन का पर्याय सफलता के अलावा कुछ नहीं है ? हम असफल हुए नहीं कि जीवन को ही नकारने लगते हैं, हर किसी को अपनी खुशियों का दुश्मन समझने लगते है जबकि यह अपने प्रति ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मनुष्यता के प्रति भी अन्याय है। 
                          सफलता और असफलता तो पल भर के लिए है। कोई भी व्यक्ति न तो स्थायी असफल होता है  और न ही स्थायी सफल । किसी एक क्षेत्र  में असफल हुआ व्यक्ति दूसरे किसी क्षेत्र में गौरवपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित कर सकता है। परिवर्तन के नियम से संचालित विश्व में दिन-रात, सर्दी-गर्मी, धूप-छाँव की तरह सफलता-असफलता का क्रम भी प्राकृतिक है। जो असफलता आज हमें दिखाई पड़ती है वह वस्तुतः सफलता का एक सोपान मात्र है। हमे सफलता को प्राप्त करने के लिए निरन्तर प्रयत्न करते रहने चाहिए ना कि असफलता के डर से भयभीत होकर अपने लक्ष्य से भटकना चाहिए। एक पत्थर के बड़े टुकड़े को तोड़ने के लिए हथौड़े से कई प्रहार किये जाते है लकिन उसके छोटे -छोटे टुकड़े उसके अंतिम प्रहार में होते है। "तो क्या अंतिम प्रहार के पूर्व सभी प्रयासों को विफल माना जाये। यह तथ्य गलत है। "
                             जीवन में सफलता का मूल मंत्र हैं -"हर असफलता को सफलता के प्रथम पग के रूप में स्वीकार करना।" प्रयास कितना ही अधूरा, छोटा या अपूर्ण हो यदि सतत जारी रहता है तो प्रत्येक चरण में हुई भूलो से कुछ सीखते हुए सुधार क्रम भी चलता रहेगा और अंततः समय आने पर पूर्णता लक्ष्य भी प्राप्त हो जायेगा । 

Wednesday, 8 April 2015

JADUI JHAADU

झाड़ू मज़ेदार होने के साथ साथ एक ऐसी वस्तु है जो हम सब के घरो में सफ़ाई के काम में लायी है। ऐसा माना जाता है कि सुबह सबसे पहले झाड़ू लगाने के बाद ही किसी दूसरे काम को करना शुभ माना जाता है। ज़रा सोचिये, अगर झाड़ू ना होती तो और आप अपने घरो को साफ़ कैसे रख पाते। एक उदहारण ने मुझे इस विषय पर लिखने को विवश कर दिया। 
                बुधवार का  दिन,  मेरी गली में बहुत गंदगी  थी सफ़ाई नही हुइ थी क्योकि मेरी गली की स्वीपर नही आयी थी। सब अपने अपने दरवाज़े के सामने घंटो से पानी डाल कर सफ़ाई कर रहे थे। पानी के साथ साथ बिजली की बर्बादी भी कर रहे थे। मेरे घर का भी यही हाल था। मेरी दादी भी इसी काम में व्यस्त थी, जब मैंने उनको मना किया तो उन्होंने मुझे डाटते  हुए कहा " बाहर झाड़ू लगाओगी गन्दी हो जाऊगी पूरी गली से क्या मतलब अपना घर साफ़ रखो बस।" हम सब अपने घरो में बेहिचक सफाई करते है क्योंकि वो हमारा हैं, तो वैसे ही अपने गली मोहल्ले व देश को भी साफ़ क्यों नही रख सकते ? आख़िर ये भी तो हमारा ही है ना। अगर हम देश को अपने घर के समान ही समझे और साफ़ रखे तो हमें किसी सफ़ाई अभियान की ज़रूरत नही पड़ेगी। बचपन से हमारी मानसिकता को ऐसा बना दिया जाता है कि हम उन लोगो को हीन द्रष्टि से देखते हैं जो हमारे जीवन को बेहतर बनाने में सबसे ज्यादा योगदान देते हैं। जिस तरह घर में झाड़ू लगाकर अपने घरों की गंदगी साफ़ करते हैं उसी तरह दिमाग की जादुई झाड़ू का इस्तेमाल करके अपनी सोच अपने नज़रिये को साफ करने की ज़रूरत हैं, क्योंकि अगर उन लोगो ने अपना काम करना छोड़ दिया तो सच में एक दिन हमें ही झाड़ू लगानी पड़ेगी
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Sunday, 8 March 2015

     स्व्भाव से शान्त और देखने में थोड़ी चुलबुली मोनिका से आज  हम उनकी ज़िन्दगी और लखनऊ विश्वविद्यालय के उनके अनुभव से जुड़े कुछ सवाल करेंगे। लखनऊ विश्वविद्यालय में अभी तक उनका कैसा अनुभव रहा इस पर बातचीत की शिखा सक्सेना ने.…।

  • आप अपने स्व्भाव और परिवार के बारे में कुछ बताए ?
  • मेरा स्व्भाव भावुक हैं , मै बहुत जल्दी भावुक हो जाती हूँ और फैसले लेने में असमर्थ हो जाती हूँ । मेरे परिवार में मैं मेरे पापा मम्मी और मेरा भाई है ।
  • आप अपने स्व्भाव की एक अच्छी और एक बुरी बात बताएं ?
  • मेरे स्व्भाव की अच्छी बात ये है कि मैं हर किसी को सहयोग करती हूँ जो भी मुझसे मद्द मांगता हैं और मेरे स्व्भाव की बुरी बात ये है कि मुझे गुस्सा बहुत जल्दी आ जाता है ।
  • आप के बचपन से लेकर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई कैसी रही और लखनऊ विश्वविद्यालय में आकर कितना फर्क महसूस हुआ। यहाँ की पढ़ाई का स्तर कितना अलग है ?
  • मुझे बचपन से लेकर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई पूरी करने में बहुत दिक्कतों  सामना करना पड़ा क्योंकि मेरा परिवार आर्थिक रूप से ज्यादा मज़बूत  नहीं है। यूनिवर्सिटी में आकर ज्यादा फर्क नहीं लगा पर हाँ, यहाँ की पढ़ाई  बहुत अच्छी हैं। 
  • यूनिवर्सिटी में अभी तक कैसा अनुभव रहा ?
  • यूनिवर्सिटी  का  माहौल काफी सकारात्मक है,, अच्छे दोस्त बने और टीचर बहुत सपोर्टिव  हैं । अभी तक बहुत कुछ सीखने को मिला हैं । यूनिवर्सिटी में पढ़ना मेरी लाइफ का सबसे अच्छा अनुभव हैं।
  • आपकी  लाइफ का कोई एचीवमेंट ?
  • मेरी पढ़ाई , क्योंकि  मेरे लिए मेरी पढ़ाई पूरी कर पाना ही मेरा एचीवमेंट हैं।
  • जर्नलिज्म की पढ़ाई ही क्यों चुनी, आप क्या बनना चाहती हैं ? 
  • मुझे ये फील्ड काफी रोचक लगती हैं और मेरा लक्ष्य हैं एक सफल रिपोर्टर बनना, उसके लिए परिश्रम जारी हैं ।
  • आपको  अपने परिवार का कितना सपोर्ट मिलता है अपनी पढ़ाई  करने में ?
  • मुझे  मेरे परिवार का पूरा सहयोग मिलता है  पढ़ाई में, मेरे परिवार के सभी  लोग बहुत सपोर्टिव है, मेरा पूरा सहयोग करते।
  • ऐसा कहा जाता है लड़कियों के लिए ये फील्ड बहुत चुनौतीपूर्ण होती हैं, उन्हें ये नहीं करना चाहिए इस पर आप  क्या कहेंगी ?
  • देखिये,,  जो ऐसा सोचते है यह उनके दिमाग की कमज़ोर सोच का नतीजा हैं ऐसी सोच लड़कियों के आगे बढ़ने  में बाधा बनती हैं। अब समय बहुत बदल चुका हैं, आज लड़कियाँ लड़कों की अपेक्षा हर क्षेत्र में ज्यादा सफल हैं। 
  • अगर आप से कहा जाएं खुद को एक शब्द  में परिभाषित कीजिए तो  वह कौन सा शब्द होगा ? 
  • हँसते हुए... मैं खुद को ट्रैजेडी क्वीन के रुप में  परिभाषित करना चाहूँगी। 
  • खाली समय में क्या करना पसंद करती हैं ?
  • मुझे  पेन्टिंग का शौक हैं, अपने खाली टाइम में मैं पेंटिंग करती हूँ,, पेन्टिंग करके खुद को बहुत रिलैक्स पाती हूँ। 
  • बॉलीवुड में कितनी दिलचस्पी रखती भी हैं? फेवरिट हीरो, हीरोइन कौन हैं ?
  • बॉलीवुड में  ज्यादा दिलचस्पी नहीं है और पसंदीदा कलाकार अमिताभ बच्चन और श्रधा कपूर हैं
  •  भारत में  इंटरनेट यूजर की तादाद दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही हैं, आपके अनुसार इंटरनेट आज के यूथ के लिए कितना हेल्पफुल हैं ?
  • इंटरनेट ने हमारी दुनिया को समेट कर बहुत  छोटा बना दिया  हैं । आज हम एक क्लिक से दुनिया के किसी  भी कोने की ख़बर को मिनटों में जान सकते हैं, दूर देश में बैठे अपने किसी परिचित  से बात  कर सकते हैं। आज इंटरनेट की मद्द  से हमें किसी भी विषय की जानकारी आसानी से हो जाती हैं, जो पहले इतना आसान नही था। इंटरनेट हमारे लिए वाकई में बहुत हेल्पफुल है बशर्ते इसका इस्तेमाल सही यूज़ के लिए किया जाएं।
  • आजकल वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की धूम मची है, लगातार मैच जीते है। आपको क्या लगता है इस बार भी टीम इंडिया वर्ल्ड कप ला पाएंगी ?
  • हाँ  बेशक, टीम इंडिया वर्ल्ड कप लाएंगी, अभी तक बहुत बेहतरीन प्रदर्शन रहा हैं। पूरी उम्मीद है टीम इंडिया वर्ल्ड कप जीत जाएंगी।
  • उत्तर प्रदेश में सपा सरकार आपके अनुसार कितनी सफल और कितनी असफल हैं ?
  • मेरे हिसाब से बराबर है। ना ज्यादा सफल और ना असफल हैं। जहाँ एक ओर यू.पी. में होता विकास सरकार की सफ़लता की दास्ता बयां करती है तो वही दूसरी ओर तीज़ी से बढ़ते अपराध सरकार की असफ़लता की निशानी हैं।
  • लखनऊ अब क्राइम कैपिटल बनता जा रहा है। महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध पर आप क्या कहना चाहंगी ? 
  • लखनऊ में महिलाओं के प्रति जघन्य अपराध लगातार बढ़ते जा रहे है। यह बहुत चिंता की बात हैं।  लखनऊ का माहोल अब एकदम भी सुरक्षित महसूस नहीं होता हैं। पुलिस का रवैया बहुत निराशाजनक है  जिस कारण  अपराधियों में कानून का कोई डर नहीं रह गया हैं। 
  • हाल ही में बजट पेश हुआ हैं। क्या आपके अनुसार अच्छे दिन आये हैं?
  • मिडिल क्लॉस लोगों के लिए सरकार ने बजट में ऐसा कुछ नहीं किया जिससे लगे कि अच्छे दिन आये हो।
  • प्रदेश में  स्वाइन फ्लू बढ़ता जा रहा हैं। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सरकार दयारा किये जा रहे प्रयासों से आप कितना संतुष्ट हैं?
  • प्रदेश में क्या बल्कि पूरे देश में स्वाइन फ्लू महामारी बन चुका हैं। कितने लोगो की मौत हो चुकी है।  सरकार के दयारा किये जा रहे प्रयास  बिल्कुल संतुष्टजनक नहीं हैं। 
  • ऐसा सुनने में आया है 10 मार्च को यूनिवर्सिटी में ABP न्यूज़ चैनल का आपके विभाग में कैंपस सेलेक्शन हैं। आप उसके लिए कितनी तैयार और उत्साहित हैं ?
  • यह बहुत अच्छा बात हैं हम सब के लिए कि हमे इतनी जल्दी इतनी बड़ी उपलब्धि मिली हैं। मैं  बहुत उत्साहित हूँ पर आत्मविश्वास कम हैं पर अपनी पूरी कोशिश करूंगी कि मेरा सेलेक्शन ज़रूर हो। 

Sunday, 15 February 2015

मेरी शिकायत किसी से नहीं बल्कि खुद से है। देश और दुनिया को बदलने की बात तो सब करते है पर दूसरो को बदलनें से पहले खुद को बदलना बहुत आवश्यक हैं ,इसलिये हम पहले अपनी कमी को हटाना चाह्ते हैं.लखनऊ विश्वविद्यालय के जर्नलिज्म विभाग में यहां मेरा दूसरा सेमेस्टर हैं,पर हम अब तक सवाल पूछने की अपनी आदत को बढ़ा नहीं पाये है। विश्वविद्यालय में अड्मिशन लेने से पहले अपने स्कूल व कॉलेज में बहुत पूछने की आदत थी मेरी। पर ना जाने क्यों विश्वविद्यालय एडमिशन मिलने के बाद अपनी इस आदत का उपयोग नहीं कर पा रहे हम, जो कि हम करना चाहते हैं और मेरे कोर्स के लिए आवश्यक भी है। बहुत सवाल होते हैं मेरे मन में पर सर के समझाने पढ़ाने के तऱीके से हम संतुष्ट हो जाते हैं कि गलत हैं, ऐसा करके हम खुद के साथ और पढ़ाई से धोका कर रहे हैं। एक बार क्लास में ऐसा कहा गया था कि शायद लोग अपनी ईगो कि वजह से क्लास में नहीं बोलते हैं पर ऐसा बिल्कुल नहीं, हम अपनी ईगो की वजह से नहीं बोलते बल्कि हिचक की वजह से हो जाता हैं। घर आकर रिवीज़न करने पर पता चलता हैं कि ऐसे बहुत सवाल हैं जो हमे पूछने चाहिए थे क्योंकि घर में उन सवालो का आंसर नहीं मिल पाता। बहुत गुस्सा आता हैं खुद पर और खुद से शिकायत भी होती कि क्यों हम सवाल पूछने में हिचक महसूस करते हैं। मेरे मन में ये भी आता हैं कि गलत सवाल पूछने पर हम गलत हुए तो हमे समझाया जायेगा टोका जायेगा जो हमे बेहतर बनाने के लिए होगा अगर संकोच करते रहे तो हम अपनी इस कमी के कारण अपने सीखने के महत्वपूर्ण समय को नष्ट देंगे। कई बार ऐसा होता हैं कि बहुत से सवालो का जवाब हमे पता होता हैं पर उन सवालो को न पूछने की वजह से हमें बहुत गिल्ट महसूस होता हैं क्योंकि मेरे परिवार ने बहुत मेहनत करी हैं हमें ये कोर्स कराने में जिसे हम अपनी कमी की वजह से अपने भविष्य को खराब नहीं कर सकते। हमें बस खुद से यही शिकायत हैं जिसका हल बस यही हैं कि ज्यादा से ज्यादा प्रश्न करके हम अपने अंदर की हिचक और कमी को आसानी से दूर कर पाएंगे और अपने कॉन्फिडेन्स को बढ़ा पाएंगे। जब हम अपनी इस कमी को दूर कर लेंगे और प्रश्न पूछने लग जाएंगे तो खुद ब खुद अपनी इस शिकायत से फ्री हो जाएंगे और तब जाकर हम दुनिया से शिकायत करने लायक बन पाएंगे।