Wednesday, 8 April 2015

JADUI JHAADU

झाड़ू मज़ेदार होने के साथ साथ एक ऐसी वस्तु है जो हम सब के घरो में सफ़ाई के काम में लायी है। ऐसा माना जाता है कि सुबह सबसे पहले झाड़ू लगाने के बाद ही किसी दूसरे काम को करना शुभ माना जाता है। ज़रा सोचिये, अगर झाड़ू ना होती तो और आप अपने घरो को साफ़ कैसे रख पाते। एक उदहारण ने मुझे इस विषय पर लिखने को विवश कर दिया। 
                बुधवार का  दिन,  मेरी गली में बहुत गंदगी  थी सफ़ाई नही हुइ थी क्योकि मेरी गली की स्वीपर नही आयी थी। सब अपने अपने दरवाज़े के सामने घंटो से पानी डाल कर सफ़ाई कर रहे थे। पानी के साथ साथ बिजली की बर्बादी भी कर रहे थे। मेरे घर का भी यही हाल था। मेरी दादी भी इसी काम में व्यस्त थी, जब मैंने उनको मना किया तो उन्होंने मुझे डाटते  हुए कहा " बाहर झाड़ू लगाओगी गन्दी हो जाऊगी पूरी गली से क्या मतलब अपना घर साफ़ रखो बस।" हम सब अपने घरो में बेहिचक सफाई करते है क्योंकि वो हमारा हैं, तो वैसे ही अपने गली मोहल्ले व देश को भी साफ़ क्यों नही रख सकते ? आख़िर ये भी तो हमारा ही है ना। अगर हम देश को अपने घर के समान ही समझे और साफ़ रखे तो हमें किसी सफ़ाई अभियान की ज़रूरत नही पड़ेगी। बचपन से हमारी मानसिकता को ऐसा बना दिया जाता है कि हम उन लोगो को हीन द्रष्टि से देखते हैं जो हमारे जीवन को बेहतर बनाने में सबसे ज्यादा योगदान देते हैं। जिस तरह घर में झाड़ू लगाकर अपने घरों की गंदगी साफ़ करते हैं उसी तरह दिमाग की जादुई झाड़ू का इस्तेमाल करके अपनी सोच अपने नज़रिये को साफ करने की ज़रूरत हैं, क्योंकि अगर उन लोगो ने अपना काम करना छोड़ दिया तो सच में एक दिन हमें ही झाड़ू लगानी पड़ेगी
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