मेरी शिकायत किसी से नहीं बल्कि खुद से है। देश और दुनिया को बदलने की बात तो सब करते है पर दूसरो को बदलनें से पहले खुद को बदलना बहुत आवश्यक हैं ,इसलिये हम पहले अपनी कमी को हटाना चाह्ते हैं.लखनऊ विश्वविद्यालय के जर्नलिज्म विभाग में यहां मेरा दूसरा सेमेस्टर हैं,पर हम अब तक सवाल पूछने की अपनी आदत को बढ़ा नहीं पाये है। विश्वविद्यालय में अड्मिशन लेने से पहले अपने स्कूल व कॉलेज में बहुत पूछने की आदत थी मेरी। पर ना जाने क्यों विश्वविद्यालय एडमिशन मिलने के बाद अपनी इस आदत का उपयोग नहीं कर पा रहे हम, जो कि हम करना चाहते हैं और मेरे कोर्स के लिए आवश्यक भी है। बहुत सवाल होते हैं मेरे मन में पर सर के समझाने पढ़ाने के तऱीके से हम संतुष्ट हो जाते हैं कि गलत हैं, ऐसा करके हम खुद के साथ और पढ़ाई से धोका कर रहे हैं। एक बार क्लास में ऐसा कहा गया था कि शायद लोग अपनी ईगो कि वजह से क्लास में नहीं बोलते हैं पर ऐसा बिल्कुल नहीं, हम अपनी ईगो की वजह से नहीं बोलते बल्कि हिचक की वजह से हो जाता हैं। घर आकर रिवीज़न करने पर पता चलता हैं कि ऐसे बहुत सवाल हैं जो हमे पूछने चाहिए थे क्योंकि घर में उन सवालो का आंसर नहीं मिल पाता। बहुत गुस्सा आता हैं खुद पर और खुद से शिकायत भी होती कि क्यों हम सवाल पूछने में हिचक महसूस करते हैं। मेरे मन में ये भी आता हैं कि गलत सवाल पूछने पर हम गलत हुए तो हमे समझाया जायेगा टोका जायेगा जो हमे बेहतर बनाने के लिए होगा अगर संकोच करते रहे तो हम अपनी इस कमी के कारण अपने सीखने के महत्वपूर्ण समय को नष्ट देंगे। कई बार ऐसा होता हैं कि बहुत से सवालो का जवाब हमे पता होता हैं पर उन सवालो को न पूछने की वजह से हमें बहुत गिल्ट महसूस होता हैं क्योंकि मेरे परिवार ने बहुत मेहनत करी हैं हमें ये कोर्स कराने में जिसे हम अपनी कमी की वजह से अपने भविष्य को खराब नहीं कर सकते। हमें बस खुद से यही शिकायत हैं जिसका हल बस यही हैं कि ज्यादा से ज्यादा प्रश्न करके हम अपने अंदर की हिचक और कमी को आसानी से दूर कर पाएंगे और अपने कॉन्फिडेन्स को बढ़ा पाएंगे। जब हम अपनी इस कमी को दूर कर लेंगे और प्रश्न पूछने लग जाएंगे तो खुद ब खुद अपनी इस शिकायत से फ्री हो जाएंगे और तब जाकर हम दुनिया से शिकायत करने लायक बन पाएंगे।
आपकी यह शिकायत हर शुक्रवार को होने वाले प्रोग्राम में हल हो सकती है ... और आपने सही कहा कि प्रश्नों को पूछना बहुत जरुरी है ... जब तक शंकाएँ दूर नहीं होंगी तब तक उलझनें बढेंगी और शिकायतें भी बढेंगी
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